लखनऊ, 24 अक्टूबर भारतीय मानसिक स्वास्थ्य एवं अनुसंधान केंद्र (IMHRC) और शिया पीजी कॉलेज के संयुक्त आयोजन में शनिवार को आठवें अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन की शुरुआत हुई। दो दिवसीय सम्मेलन का मुख्य विषय “समावेशी एवं सतत समुदायों का निर्माण : सतत विकास लक्ष्यों के लिए शोध, नवाचार और वैश्विक सहयोग” है। इसमें शिक्षा, स्वास्थ्य, मानसिक स्वास्थ्य, दिव्यांगजन सशक्तीकरण और सामाजिक विकास से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर विशेषज्ञों ने अपने विचार रखे।
एरा विश्वविद्यालय, लखनऊ के कुलपति *प्रो. (डॉ.) अब्बास अली मेहदी* ने मुख्य अतिथि के रूप में भाग लिया। उन्होंने सुलभ स्वास्थ्य सेवाओं को समावेशी समाज की आधारशिला बताते हुए कहा कि समाज के सभी वर्गों तक स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाना और उन्हें समान अवसर देना आवश्यक है।
शिया पीजी कॉलेज के प्राचार्य *प्रो. (डॉ.) एस. शबीहे रज़ा बाक़री* ने सम्मेलन के उद्देश्यों और प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला। राष्ट्रीय बौद्धिक दिव्यांगजन सशक्तीकरण संस्थान (NIEPID), सिकंदराबाद के निदेशक *मेजर डॉ. बी. वी. राम कुमार* ऑनलाइन माध्यम से सम्मेलन में शामिल हुए। उत्तर प्रदेश दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग के उप निदेशक *राजेश के. मिश्रा* ने दिव्यांगजनों के बेहतर जीवन, आत्मनिर्भरता और सामाजिक भागीदारी के लिए प्रभावी पुनर्वास सेवाओं की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि समावेशन को बढ़ावा देने के लिए दिव्यांगजनों की समय पर पहचान और हस्तक्षेप, सुलभ शैक्षणिक सुविधाएं तथा शिक्षा एवं रोजगार में समान अवसर सुनिश्चित करना जरूरी है। लखनऊ के जिला प्रोबेशन अधिकारी *सुधाकर एस. पांडेय* भी इस अवसर पर उपस्थित रहे।
एमिटी विश्वविद्यालय, लखनऊ परिसर के *प्रो. एस. ज़ेड. एच. जैदी, निदेशक, एमिटी इंस्टीट्यूट ऑफ बिहेवियरल एंड एलाइड साइंसेज एवं एमिटी इंस्टीट्यूट ऑफ रिहैबिलिटेशन साइंसेज, ने *“विविधता का सम्मान” विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने विविधता को स्वीकार करने और समाज के प्रत्येक व्यक्ति को विकास की प्रक्रिया में शामिल करने की जरूरत बताई। उन्होंने विशेष रूप से उच्च शिक्षा में समावेशी वातावरण बनाने और वंचित तथा विशेष आवश्यकताओं वाले विद्यार्थियों के लिए समान अवसर एवं सुलभ शैक्षणिक सुविधाएं उपलब्ध कराने पर जोर दिया।
मानसिक स्वास्थ्य, सामाजिक न्याय और कानूनी सशक्तीकरण के जरिए समावेशी समुदायों को बढ़ावा देने के विषय पर आयोजित पैनल चर्चा में एरा विश्वविद्यालय के *प्रो. अलीम सिद्दीकी, इंटीग्रल विश्वविद्यालय की **प्रो. ज़ेबा अकील* और एमजेपी रुहेलखंड विश्वविद्यालय के *प्रो. अमित सिंह* ने भाग लिया। वक्ताओं ने मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने, सामाजिक समानता स्थापित करने और लोगों को उनके कानूनी अधिकारों के प्रति जागरूक करने की आवश्यकता पर चर्चा की। इस सत्र की अध्यक्षता लखनऊ विश्वविद्यालय की पूर्व मनोविज्ञान विभागाध्यक्ष *प्रो. मधुरिमा प्रधान* ने की।
हेल्थकेयर सेक्टर स्किल काउंसिल की *सुश्री अंशु वर्मा* ने ऑनलाइन व्याख्यान में स्वास्थ्य क्षेत्र में कौशल विकास, व्यावसायिक प्रशिक्षण और रोजगार की संभावनाओं पर विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं के लिए प्रशिक्षित और कुशल मानव संसाधन का विकास महत्वपूर्ण है।
ब्रिटेन की यूनिवर्सिटी ऑफ नॉर्थम्प्टन के *प्रो. रिचर्ड रोज* ने ऑनलाइन व्याख्यान में समावेशी शिक्षा को मजबूत बनाने, सभी विद्यार्थियों को सीखने के समान अवसर देने और विभिन्न देशों के बीच शैक्षणिक सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की। वहीं, दुबई पुलिस अकादमी के *प्रो. होसाम एलशेनराकी* ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता और डिजिटल तकनीक के विस्तार से अपराध की बदलती प्रकृति तथा कानून और नियमन के सामने उभर रही चुनौतियों पर अपने विचार रखे।
सम्मेलन का उद्देश्य विभिन्न विषयों के विशेषज्ञों के बीच संवाद और सहयोग के माध्यम से सामाजिक चुनौतियों के समाधान तलाशना तथा समावेशी एवं सतत विकास को बढ़ावा देना है। भारतीय मानसिक स्वास्थ्य एवं अनुसंधान केंद्र (IMHRC), भारतीय प्रगतिशील युवा मंच (IPYF) ट्रस्ट की इकाई है, जो मानसिक स्वास्थ्य, दिव्यांगता, पुनर्वास और सामुदायिक विकास के क्षेत्रों में कार्य करता है। संस्था अब तक सात अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों का आयोजन कर चुकी है। सम्मेलन का दूसरा दिन रविवार, 25 अक्टूबर को आयोजित होगा।
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